नवरत्नों का महत्व

नवरत्नों या नौरत्नों हो दोनों एक ही है। इस पोस्ट में नवरत्नों का महत्व क्या है मतलब मनुष्य के शारीर रत्नों का क्या प्रभाव है, वह बताने जा रहा हूँ। नवरत्नों का ज्योतिष के क्षेत्र में मत्वपूर्ण स्थान है। रत्नों के उपयोग तथा सहयोग से ज्योतिषी बड़े कठिन से कठिन कार्य बड़ी आसानी से कर सकतें हैं। कभी कभी होनी को अनहोनी बनाकर भी दिखा देते हैं। एक बात को ध्यान में रखे, सभी रत्नों में दैवीय शक्तियां होती और हम पर जो नवरत्नों का प्रभाव पड़ता हैं वह ग्रहों के रंगों तथा उनके प्रकाश की किरणों की उत्सर्जन क्षमता के कारण होता है। नवरत्नोँ में से किसी भी रत्न को जब कोई धारण करता है तो उसके रंग की किरणे अर्थात सम्बंधित राशि की किरणे मानव शारीर में दाखिल होती रहती है जिस से सम्बंधित राशि का प्रभाव मानव पर बना रहता है। इतना भी समझ लेना चाहिए कि अगर कोई व्यक्ति ग़लत रत्न को धारण कर लेता है तो उसके बुरे परिणामोंse भी नहीं बच पाएगा। इसीलिए मैं आज आप को  नवरत्नों का महत्व बताने जा रहा हूँ।

 

किसको कौन रत्न धारण करना चाहिए ?

तो जैसे के नाम से ही पता चल जाता है की नवरत्नों की श्रेणी में मुख्य तौर पर नौ रत्न यानि gemstone आते हैं, उन नौरत्नों के बारे में बताने जा रहा हूँ –

1. माणिक्य इंग्लिश नाम Ruby
2. मोती इंग्लिश नाम Pearl
3. मूंगा इंग्लिश नाम Red Coral
4. पन्ना इंग्लिश नाम Emerald
5. पुखराज इंग्लिश नाम Yellow Sapphire
6. हीरा इंग्लिश नाम Diamond
7. नीलम इंग्लिश नाम Blue Sapphire
8. गोमेद इंग्लिश नाम Hessonite Garnet
9. लहसुनिया इंग्लिश नाम Cats Eye

Importance of Navratans - नवरत्नों का महत्व
Importance of Navratans – नवरत्नों का महत्व

1. माणिक्य Ruby किसको धारण करना चाहिए ?

1.1) माणिक्य रत्न सूर्य राशि का है। जिस व्यक्ति का जन्मकुंडली में सूर्य शुभ भावों का स्वामी हो तो उस भाव की ताकत बढ़ाने के लिया माणिक्य यानी Ruby Gemstone धारण करना लाभदायक होता है।
1.2) यदि सूर्य जन्मकुंडली में लगन का स्वामी हो तो लगन के प्रभाव को बढ़ाने के लिए माणिक्य पहनना चाहिए।
1.3) यदि सूर्य तीसरे, छठे या ग्यारहवें भाव में हो तो Ruby पहनना चाहिए।
1.4) अष्टम स्थान में यदि सूर्य हो या सूर्य अष्टमेश हो तो माणिक यानि ruby stone धारण कबी भी नहीं करना चाहिए।
1.5) सप्तम भाव में अगर सूर्य की स्थिति हो तो माणिक पहनना ग्रहस्थ सुख के लिए बेहद लाभदायक होता है।
1.6) जन्मकुंडली में यदि सूर्य पंचम भाव में या नवम भाव में हो तो बी व्यक्ति को माणिक्य धारण करना चाहिए।

2. मोती Pearl किसको धारण करना चाहिए ?

2.1) मोती चंद्र राशि का प्रसिद्ध रत्न है। जिस जन्मकुंडली में चन्द्रमा शुभ भावों का अधिपति हो , ऐसे जातक को मोती यानि White Pearl पहनना चाहिए।
2.2) यदि चन्द्रमा पंचमेश होकर बारहवें भाव में हो तो मोती पहनना शुभ मन गया है।
2.3) यदि दुसरे भाव का स्वामी चंद्रमा हो और वक् कुंडली में कहीं पर भी हो तो तब भी मोती पहनना शुभ होता है।
2.4) यदि केंद्र में चन्द्रमा की उपस्थिति हल्की हो तो ऐसे चंद्र को बलवान के लिए मोती पहना जा सकता है।
2.5) यदि चन्द्रमा पर राहु, केतु या मंगल की दृष्टि हो तो Pearl पहनना अति फलदायक होता है।
2.6) जिस व्यक्ति की कुंडली में चंद्र वृश्चिक राशि का कर कहीं पर भी बैठा हो उस जातक को मोती जरूर धारण करना चाइए।
2.7) यदि विशोंतरी दशा चल रही हो।
2.8) यदि चंद्र नीच, वक्री राहु के साथ या अष्टम हो तो भी मोती रत्न धारण करना चाहिए।

3. मूंगा Red Coral किसको धारण करना चाहिए ?

3.1) मूंगा यानि Red Coral मंगल राशि का रत्न है। जिन व्यक्तियों की जन्मकुंडली में मंगल शुभ भावों का स्वामी हो तो ऐसे जातकों को मूंगा धारण करना शुभदायक होता है।
3.2) जिस व्यक्ति की जानकुंडली में मंगल दोषित, अस्त या प्रभावहीन होता हैं उसे यह रत्न जरूर पहनना चाहिए।

4. पन्ना Emerald किसको धारण करना चाहिए ?

पन्ना यानि Emerald stone बुध का रत्न है। जिस व्यक्ति की कुंडली में बुध भावों का अधिपति हो उस व्यक्ति को पन्ना पहनना चाहिए।

5. पुखराज Yellow Sapphire किसको धारण करना चाहिए ?

पुखराज यानि Yellow Sapphire ब्रहस्पति का रत्न है। जिस व्यक्ति कुंडली में ब्रहस्पति शुभ भावों का अधिपति हो उन्हें पीला पुखराज धारण करना चाहिए।

6. हीरा इंग्लिश नाम Diamond किसको धारण करना चाहिए ?

हीरा यानि Diamond शजरा का रत्न है। जिन जातको की कुंडली में शुक्र शुभ अथवा अच्छे घरों का मालिक हो, उस जातक को हीरे से फायदा मिलेगा।

7. नीलम Blue Sapphire किसको धारण करना चाहिए ?

शनि यानि Saturn का प्रिय रत्न नीलम यानि Blue Sapphire है। अगर कुंडली में शनि लग्नेश हो या फिर शनि शुभ भावों का मालिक होते हुए शनि की महादशा चल रही तो जातक को नीलम धारण करना चाहिए।

8. गोमेद Hessonite Garnet किसको धारण करना चाहिए ?

गोमेद रत्न राहु का मन जाता है। राहु एक छाया ग्रह है जिसे अंग्रेजी भाषा मैं Dragon Head के नाम से जाना जाता है। राहु की अपनी खुद की कोई भी राशि नहीं होती हैं, जिस ग्रह के साथ बैठा होता उसी तरहं के रिजल्ट देता है। यदि लगनकुंडली में राहु चौथे, पांचवें, सातवें या दसवें घर में स्थापित हो तो राहु के रत्न गोमेद धारण करने से जातक को फायदा मिलता है।

9. लहसुनिया Cats Eye किसको धारण करना चाहिए ?

लहसुनिया केतु के रत्न है। राहु की तरह केतु की भी अपनी कोई राशि नहीं होती। यह भी राहु की तरह एक छाया ग्रह है। इसको अंग्रेजी में Dragon Tail कहते है। यदि जन्मकुंडली में केतु लग्न चतुर्थ, सप्तम, दशम। पंचम, नवम, तृतीया, षष्ठ या एकादश भाव में हो तो लसुनिया यानि Cats Eye जातक के लिए सही साबित होता है।

इस तरह आज आप सबको पता तो चल ही गया होगा के नवरत्नों अथवा नौरत्नों के क्या महत्व है। आशा करता हूँ के आप सभी को मेरी यह पोस्ट नवरत्नों का महत्व बेहद रोचक लगी होगी। इस लिए गुजारिश है के आप मेरी इस पोस्ट नवरत्नों का महत्व ज्यादा से ज्यादा शेयर करें।

अधिक जानकारी के लिए निचे  दिए हुए comment box में comment करे आपको पूरी जानकारी दी जाएगी।

रतन धारण करने से पहले अपने फैमली एस्ट्रोलॉजर से सलाह जरूर लें।

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