Rahu Stone Gomed

“जिरकान” प्रकार के पत्थर को ही गोमेद की संज्ञा दी जाती है। यह अनेक सुन्दर रंगो में पाया जाता है  और धीरे-धीरे आभूषणों में एक प्रतिष्ठित स्थान प्राप्त करता जा रहा है। बाकी सभी रत्नों की तरहं गोमेद के भी कई नाम हैं। संस्कृत भाषा में Rahu Stone Gomed को तपोमणि, गोमेदक, पिग स्फटिक कहा जाता है और हिंदी में इसे गोमेद, जटकुनिया के नाम से पुकारा जाता है। फ़ारसी भाषा में गोमेद को मेदक कहते हैं। इसका रंग शहद के रंग जैसा दीखता है।

Rahu Stone Gomed
Rahu Stone Gomed

मानव पर Rahu Stone Gomed का प्रभाव

यह रत्न शत्रु नाशक, युद्ध में विजय दिलाने वाला, अनेकों बीमारियों को नष्ट करने वाला तथा सुख प्राप्ति करवाने वाला होता है। जो व्यक्ति Rahu Stone Gomed को धारण करता है अथवा गोमेद भसम का उपयोग करता है, वह व्यक्ति कई बिमारियों से नियात प् सकता है जैसे कि नकसीर, बवासीर, कृमि रोग, वायुदोष और मुँह की दुर्गन्ध।

1. गोमेद उसी जातक को पहनना चाहिए जिनकी जन्म राशि अथवा लगन कुम्भ, वृषभ, मिथुन और तुला का हो।
2. यदि जनम कुंडली में राहु नीच का हो।
3. यदि जन्मकुंडली में राहु शुभ भावों का स्वामी होकर अपने भाव से छठे अथवा आठवें स्थान में बिराजमान हो।
4. यदि जन्म कुंडली में 02, 03, 09, अथवा 11 भाव में राहु स्थित हो।
5. यदि जन्मकुंडली में केंद्र – 01, 04, 07 और 11 भाव में राहु बैठा हो।
6. यदि जन्मकुंडली में राहु श्रेष्ठ भाव का स्वामी होकर सूर्य कि साथ बैठा हो।

Rahu Stone Gomed धारण करने का तरीका

शनिवार के दिन आर्द्रा, शतभिषा अथवा स्वाति नक्षत्र हो उस दिन पांच धातु या लोहे की मुद्रिका में गोमेद को जड़वा लें। इसके बाद जड़े हुए Rahu Stone Gomed  को चाँदी कि पत्र पर राहु यन्त्र बना कर उस पर मुद्रिका स्थापित करें। स्थापित होते ही राहु कि मंत्र का जाप करते हुए 1000 आहुतियाँ हवन में दें। तत्पश्चात आरती विसर्जन करके मुद्रिका को दाहिने हाथ कि अनामिका ऊँगली यानि right hand ring finger में धारण करें। Rahu Stone Gomed मार्किट से खरीदते समय ध्यान रहे के यह रत्न 04 रत्ती से काम नहीं होना चाहिए। इस रत्न का प्रभाव जातक के ऊपर 30 वर्ष तक रहता है। इसके बाद बेच दें या बदल दें।

गोमेद के प्राप्ति स्थान

विदेशों में Rahu Stone Gomed श्री लंका, रूस, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया, अफ्रीका, कम्बोडिया, चीन, और बर्मा में पाया जाता है। इसके इलावा गोमेद रत्न भारत में – सिन्धु, सरस्वती तथा महानदी के तटवर्ती क्षेत्र, कश्मीर कुल्लू, शिमला, बिहार प्रान्त के हजारी बाग के निकट त्रावण कोर और कोयंबटूर में भी पाया जाता है।

अधिक जानकारी के लिए निचे  दिए हुए comment box में comment करे आपको पूरी जानकारी दी जाएगी।

रतन धारण करने से पहले अपने फैमली एस्ट्रोलॉजर से सलाह जरूर लें।

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